Thursday, January 27, 2022
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जिस प्रशासन ने बरसाए फूल उसी ने दिखाया बाहर का रास्ता

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पुनः रोजगार देने का किया आग्रह

शिमला,22जून(सुमन भट्टाचार्य):  डॉ.राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के 42 आउटसोर्सिंग नर्सिंग स्टाफ को अस्पताल प्रशासन ने ऑन ड्यूटी काम से निकाल दिया है जिस पर नर्सिंग स्टाफ में रोष उत्पन्न हो गया है। आज पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि कोरोना महामारी के समय उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन रात कोरोना मरीजों की सेवा की लेकिन इसके बावजूद सरकार ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया। आउटसोर्सिंग नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि जिस प्रशासन ने उन पर फूल बरसाए उन्हें कोविड-सर्टिफिकेट दिया ऐसे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि प्रशासन उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकता है बावजूद इसके उन्हें उम्मीद थी कि इस वैश्विक महामारी में दिन-रात सेवा करने के बाद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार पॉलिसी बनाएगी। नर्सिंग स्टाफ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात की और उनसे पुनःउन्हें काम पर रखने और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी बनाने की गुहार लगाई ।

अपनाई यूज एंड थ्रो की पॉलिसी:

डॉ.राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत अरविंद राणा ने कहा कि एक ओर तो सरकार उन्हें कोरोना योद्धा बताकर फूलों से उनका स्वागत कर रही है लेकिन दूसरी तरफ उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी करते हुए स्टाफ कई बार कोरोना संक्रमित हुआ और उनके परिवार वाले भी उनके संपर्क में आने से संक्रमित हुए लेकिन उसके बावजूद भी बिना नोटिस दिए उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिन रात बिना अवकाश लिए काम किया है ऐसे में उन्हें घर जाओ कहकर काम से निकालना बेहद निराशा जनक है। उन्होंने कहा कि वह और उनके साथी पिछले 2 सालों से कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं लेकिन अब जब कोरोना की लहर कुछ नियंत्रण में आई है तो यूज़ एंड थ्रो की पॉलिसी अपनाकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि इन्हें पुनः रोजगार पर रखें और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हित में ठोस नीति बनाई जाए ताकि उनकी आजीविका चलती रहे।

अपनी व परिवार की सुरक्षा को ताक में रखकर निभाया कर्तव्य:

वहीं महिला नर्सिंग स्टाफ इंदु,शैलजा,पूनम और पूजा का भी कहना है कि उन्होंने कोरोना महामारी में अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को ताक में रखकर पूरी निष्ठा के साथ कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल की है। नर्स पूनम ने कहा कि अधिकतर महिला कर्मचारियों के दो ढाई वर्ष के बच्चे हैं लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने रात में आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दी है। उन्होंने कहा वे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात कर चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके हित में विचार करेगी।

सरकार से उम्मीद :

नर्स इंदु का कहना है कि उनका बेटा किडनी की बीमारी से ग्रसित है और उसका इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है उसके बावजूद भी वह आइसोलेटेड वार्ड में ड्यूटी करती रही। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार से उम्मीद थी कि वह उनके हित में कुछ ना कुछ करेगी लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाना बेहद दुखदायक है।

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