Wednesday, May 22, 2024
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कौशल विकास आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम: भारद्वाज

शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आज शिमला में शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से संबंधित एक कार्यक्रम में भाग लेकर लाभार्थियों से बातचीत की। मंत्री ने बताया कि इस मिशन पर साल में 1.87 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
शिमला में एक संस्थान में चल रहे ट्रेनिंग कार्यक्रम में विभिन्न ट्रेड के अंतर्गत युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां आयोजित कार्यक्रम परम्परा के हुनर को प्रमाणित करने की योजना का शुभारंभ करने के लिए किया गया था।
मंत्री ने कहा कि समाज में बहुत से ऐसे युवा हैं जो पहले से कुछ ना कुछ काम कर रहे हैं और पारंपरिक तरीके से प्रशिक्षित हैं लेकिन उनके पास कोई प्रमाण पत्र नहीं हैं। ऐसे युवाओं को प्रमाणित कर रोज़गार के बेहतर अवसर सकते हैं। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से कौशल विकास की दिशा में काम किया जा रहा है।
भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश भर में 5214 लाभार्थियों को ट्रेनिंग प्रदान की गयी है जिनमे से 1179 लाभार्थियों को रोजगार भी मिल चुका है।
मंत्री ने कहा कि 2020-21 में 820 लाभार्थियों को ट्रेनिंग प्रदान की गयी है और 2350 और लाभार्थियों को प्रदान की जा रही है जो कि केंद्र सरकार के 1500 के लक्ष्य से कहीं अधिक है। 130 से अधिक युवक/ युवतियों को इस अवधि में रोजगार भी मिल चुका है।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 200 के निर्धारित लक्ष्य से भी ज्यादा 324 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए। यह योजना शहरी रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए सहायक प्रणाली के रूप में भी कार्य कर रही है। कुल 4054 रेहड़ी-फड़ी वालों को पहचान पत्र जारी किए गए हैं। इसके अलावा 3798 प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार 54 शहरी स्थानीय निकायों में 5790 रेहड़ी-फड़ी वालों को चिन्हित किया गया हैं।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि 30 कस्बों में 5000 रेहड़ी-फड़ी वालों को ठोस कचरा प्रबन्धन नियमों, स्वास्थ्य तथा स्वच्छता पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
इस अवसर पर निदेशक शहरी विकास विभाग राम कुमार गौतम भी मौजूद रहे जिन्होंने विभाग के कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी।

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