Saturday, May 18, 2024
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अवैध नए निर्देशों से दिव्यांग छात्र होंगे सिर्फ प्रताड़ित: प्रो.अजय श्रीवास्तव

निर्देशों को कानून व केंद्र सरकार की उल्लंघना बताते हुए प्रो.अजय श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर की इन निर्देशों को तुरंत रद्द करने की मांग,कहा: नहीं मानी मांग तो जाएंगे कोर्ट

 
शिमला: प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा हाल ही में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए परीक्षा संबंधित नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को परीक्षा में एक कक्षा जूनियर राइटर रखना होगा और यह दिशानिर्देश उन विद्यार्थियों के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है तो बोलने और लिखने में असमर्थ हैं। यह बात आज हिमाचल प्रदेश राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने नए दिशा निर्देशों का विरोध करते हुए उन्हें कानूनी तौर पर अवैध और दिव्यांग छात्रों को प्रताड़ित करने वाला बताया है। उन्होंने इन नए निर्देशों को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की सरकार से मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी पत्र लिखकर आग्रह किया  कि विभाग द्वारा हाल ही में जारी परीक्षा संबंधी दिशानिर्देशों को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं करती है तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्रो.अजय श्रीवास्तव ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से कहा कि यह दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन हेतु केंद्र सरकार व यूजीसी द्वारा जारी दिशा निर्देशों का खुला उल्लंघन हैं। इससे दृष्टिबाधित एवं अन्य पात्र दिव्यांग विद्यार्थी प्रताड़ित होंगे। इनमें हाथ से लिखनेे में असमर्थ विद्यार्थियों को एक कक्षा कम पढ़ा हुआ राइटर लाने के लिए बाध्य किया जा रहा है जबकि केंद्र सरकार और यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जब तक परीक्षा संचालक एजेंसी उम्मीदवारों को स्वयं राइटर उपलब्ध नहीं कराती तब तक वे किसी भी शैक्षणिक योग्यता केे व्यक्ति को अपना राइटर रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का जब राज्य सरकार ने पालन नहीं किया था तो उन्होंने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि केंद्र सरकार के निर्देश मानने के लिए राज्य सरकार बाध्य है और संबंधित दिशानिर्देश लागू किए जाएं। केंद्र सरकार ने 2018 में अपनी गाइडलाइंस में बदलाव किया और राइटर के एक कक्षा जूनियर होने की शर्त लगा दी इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक संबंधित एजेंसी स्वयं राइटर नहीं उपलब्ध कराती है तब तक दृष्टिबाधित एवं लिखने में असमर्थ अन्य दिव्यांग विद्यार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता का राइटर ला सकते हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और यूजीसी ने लगभग 2 वर्ष पूर्व इस बारे में दिशा निर्देश जारी कर दिए थे लेकिन राज्य सरकार ने उनका पालन करने की बजाए उल्लंघन किया।
प्रो.अजय श्रीवास्तव ने कहा की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ही नहीं उच्च शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने इन अवैध दिशा-निर्देशों को लागू कराना शुरू भी कर दिया है। उन्होंने कहा यह बड़ा गंभीर मुद्दा है कि राज्य सरकार का सामाजिक न्याय विभाग केंद्र सरकार और यूजीसी के निर्देशों का खुला उल्लंघन कर दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रताड़ित कर रहा है।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और शिक्षा विभाग दिव्यांगों के प्रति अपना दायित्व निभाने में नाकाम साबित हुए हैं।
उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को पत्र के माध्यम से इन नए निर्देशों को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का आग्रह किया और साथ ही केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप दृष्टिबाधित एवं लिखने में असमर्थ अन्य विद्यार्थियों को कंप्यूटर के माध्यम से या ब्रेल में परीक्षा देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर उनकी इन मांगो को नहीं माना गया तो वह कोर्ट जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रो. अजय श्रीवास्तव के साथ शिमला आरकेएमवी कॉलेज की चार दृष्टिबाधित छात्राएं- शालिनी, मोनिका, प्रिया और किरण के अलावा उमंग फाउंडेशन की ओर से विश्वविद्यालय की पीएचडी की छात्राएं सवीना जहां और रेणुका देवी उपस्थित रही।

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