Wednesday, May 22, 2024
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जिला परिषद की बैठक में सदस्यों का जमकर हंगामा,किया वाकआउट

कार्टन के दाम बढ़ाने और बागवानों को मुआवजा न देने पर गर्माएं सदस्य, दी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

शिमला,29 जून: कार्टन के दाम बढ़ाने और किसान- बागवानों को मुआवजा ना मिलने पर मंगलवार को जिला परिषद की मासिक बैठक में जिला परिषद सदस्यों ने जमकर हंगामा किया । बैठक शुरू होते ही कांग्रेस के जिला परिषद के सदस्य सदन के बीच में आकर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।काफी देर तक सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और उसके बाद बैठक की कार्यवाही से वाकआउट कर बाहर निकल गए ।

मुआवजा तो दिया नहीं लेकिन बढ़ा दिया अतिरिक्त बोझ: कौशल मुंगटा

जिला परिषद के तहत बनाई गई उद्योग व बागवानी कमेटी के अध्यक्ष कौशल मुंगटा ने कहा कि सरकार बागवानों की अनदेखी करती रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक पहले हुई बेमौसमी ओलावृष्टि और बर्फबारी से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया है। वहीं अब सेब सीजन शुरू होते ही सरकार ने बागवानों को राहत देने के बजाय उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कार्टन के दामों में 25 रुपए तक बढ़ोतरी कर दी गई है जिससे बागवानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। यह मामला  कई बार जिला उपायुक्त और सरकार के ध्यान में लाया गया लेकिन सरकार किसानों और बागवानी के इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं दिखाई देती।

नहीं दी राहत राशि तो देंगे इस्तीफा:
उन्होंने कहा कि बागवानी का प्रदेश की आर्थिकी में बहुत बड़ा योगदान है ऐसे में सरकार का बागवानों को अनदेखा करने का रवैया किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कार्टन के दाम कम नहीं करती है और किसानों को मुआवजा नहीं देती है तो वे कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे।

वहीं अन्य सदस्यों ने भी सरकार से कार्टन के दाम कम करने और बागवानों को जल्द मुआवजा देने की मांग की।

सरकार से की जाएगी दामों को कम करने की मांग: सुरेंद्र रेटका

जिला परिषद उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका ने कहा कि आज जिला परिषद की बैठक बुलाई गई थी लेकिन बैठक में कोरम पूरा नहीं हो पाया। सदस्यों ने कार्टन के दाम कम करने और मुआवजा देने को लेकर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जिला परिषद जिला उपायुक्त के माध्यम से सरकार से दामों को कम करने की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि शिमला सेब बहुल जिला है लेकिन इस बार ओलावृष्टि और बर्फबारी के चलते काफी नुकसान हुआ है लेकिन सरकार की ओर से कोई भी राहत बागवानों को नहीं दी गई है।

 

 

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