Wednesday, May 22, 2024
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मां सरस्वती की आराधना कर बच्चों ने की छात्र जीवन की शुरुआत

नन्हें बच्चों ने लिया अक्षर ज्ञान,प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का किया गया पालन

शिमला: विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व मंगलवार को कोरोना काल में श्रद्धालुओं द्वारा सादे तरीके से श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कोरोना के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राजधानी शिमला के प्रसिद्ध कालीबाड़ी मंदिर में विधिवत सरस्वती मां की पूजा की गई। इस मौके पर छात्र जीवन की शुरुआत करने वाले नन्हें बच्चों ने स्लेट पर पहला अक्षर लिखा। बसंत पंचमी पर बच्चों को अक्षर ज्ञान देने की प्रथा के अनुसार मंदिर में मां सरस्वती की पूजा और प्रार्थना के बाद विधिवत बच्चों को पहला अक्षर ज्ञान करवाया गया और उनके छात्र जीवन की सफलता की प्रार्थना की गई।
मां सरस्वती की आराधना करते बच्चे
निभाई गई हाथे खोड़ी की परंपरा:
कालीबाड़ी मंदिर में इस मौके पर बच्चों ने पहला अक्षर लिखा। माताओं ने हाथेखोड़ी पूजा करके अपने बच्चों के हाथ में कलम पकड़ाकर इस अक्षरज्ञान देने की परंपरा को श्रद्धा से निभाया। बंगाली परंपरा अनुसार बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन बंगाली समुदाय विशेष तौर पर मां सरस्वती की आराधना करते हैं। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी ,अध्यापक और अन्य किसी भी विद्या में अध्ययनरत लोग मां की पूजा करते हैं।  मां संगीत की देवी भी मानी जाती हैं इसीलिए संगीत प्रेमी भी मां का आशीर्वाद लेते हैं। इस अवसर पर पहली बार नन्हें बच्चे लिखना सीखते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चा पढ़ाई लिखाई में बहुत कुशाग्र होता है। प्रथा अनुसार इस पूजा से पहले नन्हें बच्चों को कलम नहीं दी जाती है।
हाथे खोड़ी की परंपरा निभाते नन्हें बच्चे
इस मौके पर स्थानीय निवासियों ने भी मां सरस्वती के दर्शन किए। परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों ने भी मां सरस्वती के दर्शन किए और अच्छे परीक्षा परिणामों की प्रार्थना की। बच्चों ने उपवास रख कर मां सरस्वती की पूजा की और अपने उज्जवल भविष्य की प्रार्थना की।

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